वैदेहीनंदन
पंडित वेदांत जी महाराज
बाल-उम्र से ही श्रीरामचरितमानस पर प्रेरणादायक कविताएं लिखने की कला भी स्वत: जागृत हुई। इसका परिणाम है कि इस अल्पायु में ही आज आप सैंकड़ों कविताएं लिख चुके हैं।
वैदेहीनंदन पंडित वेदांत जी महाराज
आप छह वर्ष की छोटी आयु से ही श्रीरामचरितमानस का अध्ययन कर रहे हैं। आप ऐसे बाल व्यास हैं, जिन पर सात वर्ष की आयु में ही श्रीहनुमानजी की विशेष कृपा हुई और इस अल्प आयु (सात वर्ष) में ही आपको पूरा सुंदरकाण्ड कंठस्थ हो गया। आपका जन्म 14 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली में हुआ था। आपकी पूज्य माताश्री से आपने भजन गायिकी भी सीखते रहे हैं।
आपको बहुत छोटी उम्र से ही धार्मिक विषयों को सुनना व देखना बहुत ही पसंद था। मंदिर जाना, कथाएं सुनना एवं पूजन-इत्यादि कार्यों में आपकी शुरू से विशेष रुचि थी। आप प्रारंभ में कई यू-ट्यूब चैनल्स के लिए श्रीरामचरितमानस की चौपाई का वाचन करते थे। नौ वर्ष की आयु में झारखण्ड स्थित टंडवा में पहली बार श्रीरामकथावाचन में हिस्सा लिए तथा अब अनवरत श्रीसीताराम-कथावाचन तथा श्रीहनुमंत कथावाचन कर रहे हैं। आपमें, बाल-उम्र से ही श्रीरामचरितमानस पर प्रेरणादायक कविताएं लिखने की कला भी स्वत: जागृत हुई। आप हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत और मैथिलि भाषा में संवाद करते हैं。
प्रेरणादायक पद्यों का संग्रह "वेदांत पुष्प"
आपने मात्र 11 वर्ष की आयु में ही ‘वेदांत पुष्प’ की रचना की है। इसमें छोटे-छोटे बच्चों के लिए 50 से अधिक प्रेरणाप्रद पद्य हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को संस्कारवान, चरित्रवान और माता-पिता के प्रति सेवाभावी बनाना है। इस पुस्तक में आपके द्वारा रचित पद्यों के साथ-साथ आपका संक्षिप्त जीवन परिचय का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक का विमोचन 08 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में मा. केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी, श्री अश्विनी कुमार चौबे जी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा जी, श्री मनोज तिवारी जी आदि की उपस्थिति में किया गया।
वैदेहीनंदन - वेदांत जी के उद्धरण
भक्ति, ज्ञान और शांति का संदेश देने वाली प्रेरणादायक वाणी। जो जीवन को सरल और सार्थक बनाती है।
आपको इस धरती पर कोई अच्छे से जान सकता है तो स्वयं आप हो। इसलिए आपके विषय में कोई कुछ बता पाएगा, यह जानने की उत्सुकता के पीछे भागने से अच्छा है कि आप भगवान के नाम का जप करो। आपको ध्यान रखना है कि आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं है।
आपके भीतर सारी शक्तियां हैं। आप उसे नाम-जप से जागृत कर सकते हैं। जितना नाम-जप उतना अधिक प्रभाव। आज तक जितने सफल संन्यासी हुए हैं, उनके पीछे उनका नाम-जप और सत्कर्म ही रहा है।
हमें यह समझ लेना चाहिए कि इस ब्रह्माण्ड में आपको कोई अलग स्थान दिला सकता है तो वो आपका सत्कर्म और आपके भीतर की सत्यता है। सत्य को कितने भी तरह से कहें, फिर भी हर बार सत्य ही समान होगा और झूठ को कितना भी घुमाकर कहें, झूठ झूठ ही होता है।





